Akhir kanoon ko kisne becha

Akhir kanoon ko kisne becha (Paperback, Bineet Kumar)

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Akhir kanoon ko kisne becha  (Paperback, Bineet Kumar)

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    लेखक
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    Highlights
    • Binding: Paperback
    • Publisher: Redgrab Books Pvt Ltd
    • Genre: Fiction
    • ISBN: 9788119562985
    • Edition: 1, 2024
    • Pages: 120
    सर्विस
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  • जानकारी
    प्रस्तुत उपन्यास “आखिर कानून को किसने बेचा?" एक ऐसी पुस्तक है, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भ्रष्टाचार और नियम-कानून की वीभत्स स्थिति को दर्शाती है। आज नियम-कानून एक ऐसा ढोल बन गया है , जिसे जो चाहे, जब चाहे , जितना चाहे, जैसे चाहे बजा जाता है। थाना , कोर्ट- कचहरी नामक मंडियों में सरेआम नियम-कानून बेचा जाने लगा है। तमाम सरकारी पदों पर बैठे नियम-कानून के विक्रेता बड़ी शान से अच्छे मूल्य पर नियम-कानून बेचने में गर्व महसूस कर रहे हैं। आज कानून वही है , जो एक अदना-सा सरकारी कर्मचारी से लेकर उच्च पदों पर आसीन पदाधिकारी चाहता है , वह नहीं जो हमारे कानून की किताबों में अंकित हैं ।और ये कानून के मंडी के दलाल वकील , कानून के रक्षक एक सिपाही से लेकर थानेदार , पुलिस अधीक्षक , कानून मंत्री तक और ये कानून के तथाकथित संपोषक उच्च सरकारी पदों पर बैठे पदाधिकारी से लेकर चपरासी तक कानून का मंडी सजाकर बैठे हैं , जहांँ हमारे ही बीच के चतुर , चालक , अवसरवादी , धूर्त धनपति से लेकर आम जनता तक नियम-कानून का खरीद-फरोख्त में संलग्न है। आज देश को किसी दुर्दांत अपराधी , नक्सली , उग्रवादी , आतंकवादी से कहीं ज्यादा खतरा इस भ्रष्टाचार के छत्रछाया में नियम-कानून की मंडी सजाकर बैठे कानून के दलालों , विक्रेताओं से ज्यादा है। यह देश के लिए चिंतनीय विषय है।
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    Specifications
    Publication Year
    • 2024
    Manufacturing, Packaging and Import Info
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