सैनिकों का शौर्य शहीदों की शहादत, किसानों के कठिन श्रम का अनिश्चित परिणाम, नारियों का शोषण, अशांति से विक्षुब्ध मन की व्याकुलता, समाज तथा राष्ट्र में फैली कलुषित राजनीति के भंवर में फंसे बेरोजगार युवाओं का दर्द, और झूठे प्रेम के पाश में फंसा नादान तरुण_ तरूणी की दिवा स्वप्न को उजागर करता और गणतंत्र के नाम पर परतंत्रता की झलक दिखाता हुआ यह कविता संग्रह हमारे पाठकों एवम साहित्य प्रेमियों को आत्मानुभूति कराएगा।