द सेकेंड सेक्स : वॉल्यूम - 1
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Vani Prakashan द सेकेंड सेक्स : वॉल्यूम - 1 (पेपर बैक)

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ऑथर इन्फो
सिमोन द बोव्आर - सिमोन द बोव्आर का जन्म 9 जनवरी, 1908 को पेरिस में हुआ था। उन्होंने एक कैथोलिक स्कूल में बाकालोरेया यानी बारहवीं तक की पढ़ाई की। 1929 में दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और 1943 तक मारसेई, रुओं और पेरिस में पढ़ाया। उनका साहित्यिक पदार्पण L'Invitée (लऐंवीते, 1943) के साथ माना जाना चाहिए। इसके बाद Le sang des autres (ल सौं देज़ोत्र, 1945); Tous les hommes sont mortels (तू लेज़ ओम्म सौं मोर्रतेल, 1946); Les Mandarins (ले माँदारें), वह उपन्यास जिसने उन्हें 1954 में गोंकुर्र पुरस्कार दिलवाया; Les Belles Images (ले बेल्ज़ ईमाज, 1966), et La Femme rompue (ला फ़ाम्म रोमप्यु, 1968) । 1949 में प्रकाशित प्रसिद्ध Le deuxième sexe (द सेकेंड सेक्स) के अलावा, जो सम्पूर्ण विश्व में नारीवादी आन्दोलन का सन्दर्भ ग्रन्थ बन गया है, सिमोन द बोब्आर के सैद्धान्तिक काम में कई दार्शनिक और विवादास्पद निबन्ध शामिल हैं। उदाहरण के लिए Privilèges (प्रिविलेज, 1955) और La Vieillesse (ला वीआईयेस, 1970)। उन्होंने थिएटर के लिए, Les Bouches inutiles (ले बूश इन्यूतील, 1945) लिखा और L'Amérique au jour le jour (लामेरीक ओ जूर ल जूर, 1948), et La Longue Marche (ला लोंग मार्श, 1957) में अपने कुछ यात्रा-वृत्तान्त लिखे । सात्र की मृत्यु के बाद, सिमोन द बोब्आर ने 1981 में La Cérémonie des adieux (ला सेरेमोनी देज़ादीय) और 1983 में Lettres au Castor (लेत्र ओ कास्तर) प्रकाशित किया, वे पत्र-संग्रह जो उन्हें सार्च से प्राप्ता हुए थे। सात्र के साथ उन्होंने Les Temps modernes (ले तीं मोदेन) नामक पत्रिका आरम्भ की और अस्तित्ववादी आन्दोलन के एक महत्त्वपूर्ण नेता के रूप में उभरीं। अपनी मृत्यु के दिन, 14 अप्रैल, 1986 तक, वे सक्रिय रूप से इस पत्रिका में योगदान करती रही थीं और नारीवाद के साथ उनकी प्रतिबद्धता विभिन्न और असंख्य रूपों में व्यक्त हुई। बोआर अपनी पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक थीं । ܀܀܀ मोनिका सिंह - जन्म : सासाराम, बिहार में । आरम्भिक शिक्षा सासाराम, पटना में। जबलपुर से स्नातक के बाद दिल्ली में फ्फ्रांसीसी दूतावास के सांस्कृतिक केन्द्र-आलियोंस फ्राँसेज़ में फ्रेंच भाषा का अध्ययन । वर्ष 1997 से हिन्दी, अंग्रेज़ी व फ्फ्रेंच भाषाओं की अनुवादक । वर्ष 2002 से फ्रेंच भाषा का अध्यापन। कविता, कहानी, उपन्यास, लेख एवं फ़िल्म पटकथा के अनुवाद के अलावा पेरिस के लूव्र म्यूज़ियम की सम्पूर्ण यात्रा-विवरण पुस्तिका का अनुवाद। प्रमुख अनूदित पुस्तकें- तुम्हारे लिए, मेरी आन्न ! (फ्रौंस्वा मितेरी), बनारसी हाइकू (स्विस कवि व चित्रकार जौं-मिशेल रोबेर), मैं गुमशुदा, हनीमून, गुमनामी से परे, नीली फ़िएट कार (चारों उपन्यास नोबल पुरस्कार प्राप्त पात्रिक मोदियानो द्वारा)। सर्वश्रेष्ठ अनुवाद (फ्फ्रेंच-हिन्दी) के लिए 'रोमैं रोलों' पुरस्कार से सम्मानित । सम्प्रति : दिल्ली के आलियोंस फ्रोंसेज में फ्फ्रेंच भाषा की प्रोफ़ेसर एवं स्वतन्त्र अनुवादक । ई-मेल : monicasingh1968@gmail.com
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