ऑथर इन्फो
मैं विनीता यादव हूँ।
पत्रकारिता मेरे लिए कभी पेशा नहीं रहा—यह मेरा स्वभाव है, मेरी जिज्ञासा है और कभी-कभी तो मेरा संघर्ष भी। स्टूडियो से सड़क तक, कैमरे की रोशनी से लेकर अँधेरी गलियों तक—मैंने सच की तलाश में जितने क़दम बढ़ाये, उतने ही सवाल भी मेरे भीतर जगे। पिछले 23 वर्षों में 66 से भी ज़्यादा स्टिंग ऑपरेशन किये हैं, और हर स्टिंग के बाद मुझे यह एहसास और पुख़्ता हुआ कि समाज दिखाई देने जितना साफ़ नहीं होता, और शब्द सिर्फ़ लिखे नहीं जाते—लड़ते भी हैं।
मैं कहानियाँ लिखती नहीं, मैं उन्हें जीती हूँ—उनसे मिलती हूँ, उनकी आँखें पढ़ती हूँ, उनके सच को अपने भीतर उतारती हूँ और फिर वही सच काग़ज़ पर बहता चला जाता है। कई बार मेरी क़लम दर्द में डूबी हुई होती है, कई बार ग़ुस्से में, और कई बार ऐसे सवाल लेकर जिनका जवाब आज भी समाज के पास नहीं है।
मेरी नज़र हर उस जगह जाती है जिसे लोग छिपा देना चाहते हैं। मैं उन आवाज़ों को सुनती हूँ जिन्हें कोई सुनना नहीं चाहता, उन कहानियों को उठाती हूँ जो असहज हैं, कड़वी हैं, लेकिन सच हैं। शायद यही वजह है कि मेरे लिखे पन्ने सिर्फ़ पढ़े नहीं जाते—वो कचोटते हैं, बेचैन करते हैं, सोचने पर मजबूर करते हैं।
मैं चाहती हूँ कि मेरा लेखन दस्तावेज़ बनकर न रहे—वह एक सवाल बने। एक शक बने। एक झटका बने।
ताकि अगर कोई पाठक मेरी किताब बन्द भी करे, तो उसकी सोच बन्द न हो।
मैं विनीता यादव।
सिर्फ़ लिखती नहीं—सच को दर्ज करती हूँ।
जिसे दुनिया छिपाती है, मैं वही उजागर करती हूँ।
ट्विटर : @विनीतनेव