त्याग का मूल्य रवींद्रनाथ ठाकुर (रवींद्रनाथ टैगोर) का एक प्रसिद्ध कविता संग्रह है, जिसमें उन्होंने त्याग, बलिदान और आत्मनिर्भरता के महत्व को दर्शाया है। इस संग्रह में कवि ने मानवता, समाजसेवा, और आध्यात्मिक उन्नति के लिए आत्मिक त्याग की आवश्यकता को उकेरा है। रवींद्रनाथ ने त्याग को एक सच्ची शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे व्यक्ति अपने आत्म-बोध को प्राप्त कर सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनका मानना था कि सच्चा त्याग न केवल व्यक्तिगत सुख को छोड़ने से जुड़ा होता है, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदारी और स्वार्थ से परे होकर समाज की सेवा करने का एक आध्यात्मिक प्रयास है। इस संग्रह में त्याग का मूल्य को सच्चे और स्थायी सुख की प्राप्ति से जोड़ा गया है, जो व्यक्ति मूल्यों और नैतिकता के साथ अपने जीवन को जीता है।
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Publication Year
2025
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रवींद्रनाथ ठाकुर, जिन्हें रवींद्रनाथ ठाकुर या रवींद्रनाथ टैगोर के नाम से भी जाना जाता है, बंगाली कवि, लेखक, संगीतकार, और दार्शनिक थे। वे 1861 में कोलकाता में जन्मे और 1941 में निधन हुआ। रवींद्रनाथ टैगोर को गुरुदेव के नाम से भी सम्मानित किया जाता है। वे पहले एशियाई व्यक्ति थे, जिन्हें नोबेल पुरस्कार (1913) प्राप्त हुआ था, यह पुरस्कार उन्हें उनकी प्रसिद्ध काव्य कृति गीतांजलि के लिए मिला। रवींद्रनाथ ने कविता, नाटक, गीत, कहानियाँ, और निबंध जैसी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज और संस्कृति को अपनी अनूठी सोच और भावनाओं से समृद्ध किया। उनकी रचनाओं में भारत की सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीयता, और मानवता के प्रति गहरी आस्था प्रकट होती है। उनके द्वारा रचित जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गीत बन गया, और आमार सोनार बांग्ला बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत है। रवींद्रनाथ टैगोर का योगदान साहित्य, संगीत, कला और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य रहेगा।
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