“हमारा पतोर” बिहार के दरभंगा ज़िले के हायाघाट प्रखंड के एक पंचायत की कहानी है, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा यह उस मिट्टी की कहानी है, जहाँ संघर्ष साधारण होता है और बदलाव असाधारण। यह पुस्तक पतोर पंचायत और उसके नेतृत्व की उस यात्रा को सामने लाती है, जो गरीबी, अभाव और कठिन परिस्थितियों से निकलकर सेवा और विश्वास तक पहुँची है।
यह कहानी है फेकन पासवान की - एक ऐसे व्यक्ति की, जिसने जीवन के शुरुआती वर्षों में भूख, असुरक्षा और सामाजिक विषमता को बहुत क़रीब से देखा। बचपन की गरीबी, मज़दूरी से भरा युवावस्था का समय, शहरों में काम की तलाश, जेल तक की कठोर परिस्थितियाँ और फिर बार-बार गाँव लौटकर लोगों के बीच खड़े रहने का साहस - यह यात्रा बताती है कि जीवन कितनी भी बार गिराए, इंसान अगर अपनी नीयत और सच्चाई न छोड़े, तो रास्ता खुद बनता है।
“हमारा पतोर” केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं है। यह उस पंचायत की सामूहिक कहानी है, जहाँ सड़क बनना सिर्फ़ निर्माण नहीं, बल्कि वर्षों के इंतज़ार का अंत है, जहाँ तालाब का सौंदर्यीकरण सिर्फ़ विकास नहीं, बल्कि आस्था और पहचान की वापसी है, जहाँ वृद्धजन पेंशन, स्वच्छता, पानी और शिक्षा जैसे विषय सरकारी फ़ाइलों से निकलकर लोगों के जीवन का हिस्सा बनते हैं। इस पुस्तक में पतोर की छोटी-बड़ी समस्याएँ, लोगों की उम्मीदें और वे फैसले दर्ज हैं, जो किसी नेता की नीयत, संवेदनशीलता और ज़मीनी समझ को उजागर करते हैं।
यह पुस्तक दिखाती है कि पंचायत स्तर का नेतृत्व कैसा होता है - जहाँ विकास भाषणों से नहीं, रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों से आगे बढ़ता है। यह उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने गाँव से जुड़कर कुछ करना चाहते हैं, उन पाठकों के लिए आईना है जो अपने आसपास के समाज को नई दृष्टि से देखना चाहते हैं और उन शोधकर्ताओं के लिए एक जीवंत दस्तावेज़ है जो ग्रामीण भारत की वास्तविक तस्वीर को समझना चाहते हैं।
यह पुस्तक KKN Publication के Pioneers of Change – Panchayat Series के अंतर्गत प्रकाशित की गई है, जिसका उद्देश्य स्थानीय नेतृत्व, ज़मीनी कहानियों और ग्रामीण भारत में हो रहे वास्तविक परिवर्तनों को एक दस्तावेज़ का स्वरूप देना है।
“हमारा पतोर” लोगों के विश्वास, संघर्ष और उम्मीदों की कहानी है। यह बताती है कि असली बदलाव अक्सर बहुत दूर नहीं होता—वह हमारे गाँव, हमारी गलियों और हमारे बीच के लोगों से ही शुरू होता है। यदि आप ऐसी कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं जो ज़मीन से जुड़ी हों, सोच को गहराई दें और गाँव के प्रति गर्व जगाएँ, तो यह पुस्तक आपके लिए है।