इंसानी दिमाग की एक सब से बड़ी ख़ासियत है ... तसव्वुर और ख़याल। इंसान जो बातें सोचता है वो ख़याल बन कर उसके दिमाग़ की वादियों में मंडराती रहती हैं और फिर इन ख़यालात के अक्स यानी परछाईं हमेशा के लिए उसके साथ और उसके बाद भी रह जाते हैं। ये अक्स जब कलमबंद हो ख़ूबसूरत अल्फाज़ की मोतियों में पिरो दिये जाते हैं तो ऐसे ही अक्सी ख़यालों के कविताओं का संग्रह का नाम होता है " अक्स ख़यालों के " जो आपके पेश-ए-नज़र है।
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Publication Year
2024
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