इससे पहले कि डिप्टी साहब कुछ कहते, प्रधानाध्यापक लोकलाज छोड़ सीधे उनके चरणों में लोट गए।
“अरे। यह आप क्या कर रहे हैं ? छोड़िए मेरा पैर !”” डिप्टी साहब चिहुँकते हुए पीछे हटे, मगर इस बात का पूरा ध्यान रखा कि उनका पैर छूटने न पाए। जानते थे कि शिकार जितनी ज्यादा देर चरणों में लोटेगा, उतनी ही ज्यादा टेंट ढीली करेगा।
प्रधानाध्यापक की कमाई का आधा हिस्सा पूरी ईमानदारी से प्रधान गुड्डू ठाकुर के पास पहुँचता था। उनका लड़का विक्की ठाकुर इसी पाठशाला का होनहार छात्र था। भविष्य में सरकार कहीं चुनाव लड़ने के लिए शिक्षित होना अनिवार्य न कर दे, बस इसी इकलौते उद्देश्य से वह अपना अमूल्य समय स्कूलों में बर्बाद कर रहे थे, वरना उनमें योग्यता की कोई कमी न थी।
प्रधानाध्यापक को डिप्टी साहब के चरणों में लोटते देख उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ। वे नट्टी फाड़ चीख पड़े--“'मास्सा '“ब, नाम है आपका परशुराम और काम कर रहे हैं सुदामा जैसा ? यह भ्रष्टाचारी आपसे रिश्वत माँग रहा है। चरणों में लोटने के बजाय उठाइए अपना फरसा और नाश कर दीजिए धरती से इन भ्रष्टाचारियों का।'!
इसी पुस्तक से
भ्रष्टाचार पर प्रह्यार और सफेदपोशों को बेनकाब करती ये कहानियाँ हमें उद्वेलित, आक्रोशित और आंदोलित करेंगी और संभवतः सर्वव्यापी भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए कमर कसने के लिए प्रेरित भी |
Read More
Specifications
Dimensions
Width
5.5
Height
8.5
Depth
1
Weight
200
Book Details
Title
Yatra-Tatra-Sarvatra
Publication Year
2022 september
Number of Pages
152
Product Form
Hardcover
Publisher
Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
ISBN13
9789394755017
Book Category
Fiction Books
Book Subcategory
Politics Books
Edition
1st
Language
Hindi
Contributors
Author Info
संजीव जायसवाल 'संजय!
रचना-संसार : 13 कहानी-संग्रह, 12 उपन्यास, 2 व्यंग्य-संग्रह, 29 चित्र कथाएँ तथा 1100 से अधिक कहानियाँ/व्यंग्य प्रकाशित ।
रेडियो एवं टी.वी. पर कई कहानियाँ, नाटक एवं भेंटवार्त्ताएँ प्रसारित ।
पुरस्कार-सम्मान : भारत सरकार का 'भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार” (वर्ष 2005 एवं
2010), उ.प्र. हिंदी संस्थान का ' सूर पुरस्कार- 2005', 'सोहनलाल द्विवेदी पुरस्कार-2005', ' अमृतलाल नागर कथा सम्मान-2013 ', दो लाख रुपए का ' साहित्य- भारती पुरस्कार-2018 ', रेल मंत्रालय का “प्रेमचंद पुरस्कार-2015 ', राष्ट्रीय स्तर की कई कहानी प्रतियोगिताओं में प्रथम पुरस्कार, यूनीसेफ और सी.बी.टी. द्वारा कई रचनाएँ प्रकाशित व सम्मानित
अनुवाद : उपन्यास ' होगी जीत हमारी ' 15 भाषाओं में, 'डूबा हुआ किला' 4 भाषाओं में, “चंदा गिनती भूल गया', 'सूरज का गुस्सा' और “टूटा पंख' 9 भाषाओं में प्रकाशित। चित्र कथा “वह हँस दिया' विश्व की 140 भाषाओं में अनूदित।
संप्रति : पूर्व आई.आर.पी.एस. अधिकारी, आर.डी.एस.ओ. (भारत सरकार) के निदेशक पद से सेवानिवृत्त ।
Be the first to ask about this product
Safe and Secure Payments.Easy returns.100% Authentic products.